झारखंड में स्वास्थ्य विभाग की खुल गई पोल, पलामू में एक ही परिवार के 6 सदस्यों की बीमारी से मौत
Upendra Kumar Papu @ Bureau Chief-United Palamu
Ranchi : झारखंड में स्वास्थ्य सेवा कैसा है और किस तरह है, इसका पोल खुल गया। पलामू में एक गरीब परिवार के 6 सदस्यों की अज्ञात बीमारी से जान चली गई। इस बारे में ना तो पलामू का एमएमसीएच कुछ कर पाया और नहीं झारखंड का प्रसिद्ध आरएमसीएच। पलामू जिले के पड़वा प्रखंड अंतर्गत सिक्का ग्राम में अज्ञात बीमारी से एक ही परिवार के 6 लोगों की जीवन लीला समाप्त हो गई। मामले में झारखंड का स्वास्थ्य महकमा देखता रह गया और एक-एक करके 6 सदस्य इस दुनिया से चले गए।

19 जून से शुरू हुआ था मौत का सिलसिला
तारीखों के आईने में देखें तो यह तबाही महज 10 दिनों के अंदर आई. सबसे पहले 19 जून को कुलदीप महतो की मौत हुई. इसके अगले ही दिन (20 जून) उनकी बेटी बबीता ने दम तोड़ दिया। 26 जून को दूसरी बेटी इंदु की जान चली गई. इसके बाद रविवार (28 जून) को रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल में इलाज के दौरान बहू श्वेता देवी की मौत हो गई,सोमवार (29 जून) को बेटे नकुल महतो ने भी दम तोड़ दिया और कुलदीप मेहता की पत्नी लाखो देवी की रांची रिम्स में 7 जुलाई को मौत हो गई।
एपेडमिक ड्रॉप्सी नामक बीमारी से हुई मौत : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले के बाद 195 घर के 1378 लोगों का सर्वे किया गया था। इसमें कुछ लक्षण वाले 56 लोगों का रक्त सैंपल लिया गया था। जांच के बाद इसकी रिपोर्ट सामान्य पाया गया था। उन्होंने कहा कि परिवार के 6 सदस्य की मौत एपेडमिक ड्रॉप्सी से हुई है। सिविल सर्जन ने इसे विषाक्त बीमारी बताया। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवार के घर से सरसों तेल, वनस्पति ऑयल, आटा, चावल और अरहर दाल का सैंपल एकत्र किया गया था।भेजे गए सरसों तेल के नमूने में आर्गेमोन तेल की मिलावट की पुष्टि हुई है। रांची स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, नामकुम की जांच रिपोर्ट में नमूना आर्गेमोन तेल की उपस्थिति के कारण मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाया गया है। सिविल सर्जन ने बताया कि सर्वप्रथम 1877 में कोलकता में इस बीमारी की पुष्टि की गई थी। 1998 में दिल्ली में करीब तीन हजार लोग इस बीमारी से प्रभावित हुए थे।2011 में पंजाब में भी बीमारी का पता चला था। इसके बाद सिक्का गांव में यह घटना घटित हुई है।



