
पाटन प्रखंड के किशुनपुर में निकाली गई नारी शक्ति वंदन पदयात्रा
नारी का सम्मान और उनका सशक्तिकरण विकसित भारत निर्माण की नींव – अरुणा शंकर
नारी के सशक्त होने से देश होगा सशक्त – स्मिता आनंद
Palamu : पाटन प्रखंड अंतर्गत किशुनपुर गाँव में महिलाओं के द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेत्री सुश्री स्मिता आनंद एवं मेदिनीनगर के महापौर श्रीमती अरुणा शंकर के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल के समर्थन में पदयात्रा निकाली गई। यह पद यात्रा किशुनपुर अम्बेडकर चौक से प्रारम्भ होकर विभिन्न चौक चौराहों से होते हुए चनेया बाजार तक गई। भारी संख्या में उपस्थित महिलाओं के नारी शक्ति जिन्दावाद के नारों से पुरे क्षेत्र को गूंजयमान हुआ।
मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेत्री सुश्री स्मिता आनंद ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि समतामूलक और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक संकल्प है, यह अभियान देश की आधी आबादी को निर्णय-निर्माण की मुख्यधारा में लाकर लोकतंत्र को और अधिक सशक्त,समावेशी एवं प्रगतिशील बनाने का माध्यम बन रहा है, यह पहल नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सशक्त भारत के उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है, जिसमें महिलाएं केवल सहभागी नहीं,
बल्कि परिवर्तन की अग्रदूत हैं। उन्होंने कहा कि आइए, हम सभी इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनें, अपनी आवाज़ को सशक्त करें और नारी शक्ति के सम्मान में खड़े होकर नए भारत की नींव को और मजबूत करें।

मेदिनीनगर के महापौर अरुणा शंकर ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” देश की करोड़ों माताओं और बहनों के सम्मान, अधिकार और आत्मबल को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. उन्होंने इसे केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि “नारी तू नारायणी” की भावना को साकार करने का राष्ट्रीय प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यही विकसित भारत की नींव है।
महिला मोर्चा अध्यक्ष नीलिमा झा ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के अभूतपूर्व प्रयास हुए हैं. महिलाओं ने इस ऐतिहासिक अधिनियम के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया और इसे सामाजिक-राजनीतिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक युगांतरकारी कदम बताया वहीं उक्त मौके पर सांसद प्रतिनिधि सुमन गुप्ता ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत की लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम है। यह सिर्फ महिलाओं के लिए अवसरों के द्वार नहीं खोलता, बल्कि सत्ता के केंद्र को अधिक समावेशी बनाता है।यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत है।
मौके पर पिंकी विश्वकर्मा, शिला दुबे, निर्मला देवी, मुन्नी देवी, कुनीता देवी, मालती देवी समेत हज़ारों की संख्या में महिलाएं उपस्थित हुई।




