रेफर मरीजों को समय पर नहीं मिली एंबुलेंस, सदर अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल

लापरवाही पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई : उपायुक्त

Sanjay prajapati @ united palamu


Latehar : सदर अस्पताल लातेहार की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार शाम सड़क दुर्घटना में घायल मीना देवी सहित अन्य मरीजों को इलाज के बाद बेहतर उपचार के लिए रांची रिम्स रेफर किया गया, लेकिन परिजनों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में एंबुलेंस की सुविधा होने के बावजूद रेफर मरीजों को समय पर वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाता, जिससे उन्हें निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है। उनका कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से जारी है।

अस्पताल पहुंचे आजसू जिलाध्यक्ष अमित पांडेय ने जताई नाराजगी।


घटना की जानकारी मिलने पर आजसू पार्टी के जिलाध्यक्ष अमित पांडेय सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में मौजूद मरीजों एवं उनके परिजनों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया।अंबाकोठी निवासी अविनाश पासवान ने बताया कि उन्होंने एक दुर्घटना में घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन चिकित्सकों ने उसे रिम्स रेफर कर दिया। उन्होंने कहा कि रेफरल के बाद एंबुलेंस की मांग की गई, लेकिन करीब ढाई घंटे तक इंतजार करने के बावजूद वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। इस दौरान मरीज दर्द से कराहती रही।अस्पताल परिसर में मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों ने भी इसी प्रकार की शिकायतें कीं। उनका आरोप था कि अस्पताल में रेफर मरीजों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई जाती।

अमित पांडेय ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि सभी एंबुलेंस खराब हैं और 108 एंबुलेंस की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि काफी देर तक इंतजार के बावजूद वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके बाद उन्होंने उपायुक्त एवं सिविल सर्जन को फोन कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई।उन्होंने अस्पताल की बदतर रवैया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता है। साथ ही आरोप लगाया कि मरीजों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।अमित पांडेय ने यह भी आरोप लगाया कि एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद उसे खराब बताकर टालमटोल किया गया।उन्होंने कहा कि मरीजों को रेफरल के दौरान ऑक्सीजन सुविधा भी तत्काल उपलब्ध नहीं कराई गई और हंगामे के बाद वाहन 108 में ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया।


वहीं, इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन फोन रिसीव करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया मोबाइल चार्जिंग पर लगा हुआ है।


सिविल सर्जन का पक्ष


सिविल सर्जन डॉ. राजमोहन खलखो ने बताया कि उन्हें अमित पांडेय द्वारा मामले की जानकारी दी गई थी। सूचना मिलते ही उन्होंने स्थिति की जांच कराई। जांच में पता चला कि 108 एंबुलेंस को जाना था, लेकिन चालक को विलंब से पहुंचने के कारण समस्या उत्पन्न हुई।उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसी को पत्र जारी किया गया है और इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास हमेशा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का रहता है।

लापरवाही पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई : उपायुक्त

उपायुक्त संदीप कुमार ने कहा कि जैसे ही उन्हें मामले की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल स्थिति की समीक्षा की। जांच में पाया गया कि 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया जा चुका था, लेकिन वाहन पहुंचने में देरी हुई।उन्होंने बताया कि इसके बाद तुरंत वाहन 108 और एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन लगातार स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी कर रहा है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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