
अशोक कुमार मिश्र के निधन से शोक में डूबा शिक्षा जगत : प्रियरंजन पाठक
Palamu : अशोक कुमार मिश्र संस्कृत के विद्वान शिक्षक थे। उनका घर सगुनी, पाटन में है। वे लगभग 4 महीने से विकट परिस्थितियों से जूझ रहे थे। उनका किडनी कार्य करना बंद कर दिया था। वे रांची के देवकमल अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे कभी भी स्वाभिमान में कोई कमी नहीं किया और न ही सम्मान के साथ कोई समझौता किया। ऐसे लोग विरले होते हैं।।उनका व्यक्तित्व सरल, मृदुभाषी और स्वाभिमानी था। उनके जीवन से कई प्रेरणा मिलती हैं। उनके निधन से शिक्षा जगत में अपूरणीय क्षति देखी जा रही है। जिसकी भरपाई वर्तमान समय में असंभव है। उक्त बातें राष्ट्रीय सेवा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष प्रियरंजन पाठक समर्पण ने कही। वे शोक सभा में बोल रहे थे।

राष्ट्रीय सेवा मंच जो सामाजिक कार्यों की अखिल भारतीय संस्था है तथा सार्वभौम शाकद्वीपीय ब्राह्मण महासभा की ओर से स्थानीय तुलसी मानस मंदिर में शोक सभा आयोजित की गई। इस संबंध में रामप्रवेश पंडित, विजय शंकर मिश्रा, उमाशंकर मिश्रा, वीरेंद्र मिश्रा,ओम प्रकाश कुमार, रक्षा सूत्र परिवार से विशाल यादव, राष्ट्रीय सेवा मंच के जिला सचिव प्रेम प्रकाश दुबे, जितेंद्र तिवारी जी सहित कई लोगों ने अशोक कुमार मिश्रा के शोक में अपने उदगार व्यक्त किया।
सभा की अध्यक्षता प्रोफेसर कृष्ण कुमार मिश्रा, जो सार्वभौम शाकदीपीय ब्राह्मण महासभा के पलामू जिला अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय सेवा मंच के संरक्षक हैं, ने किया। साथ-साथ उन्होंने अपने उदगार व्यक्त किया। राष्ट्रीय सेवा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष प्रियरंजन पाठक ने अशोक कुमार मिश्रा के शोक में कविता पाठ किया। कहा, अशोक के जाने से शोक में डूबा शिक्षा जगत, समाज के हर गलियारों से उठ रही अफसोस की कसक, के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी लोगों ने अशोक कुमार मिश्र जी के चित्र पर पुष्पांजलि किया तथा दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दिया।

ईश्वर से प्रार्थना की गई कि उन्हें अपने चरणों में स्थान दें तथा दुख के इस बेला में परिवार जनों को दुख सहने की क्षमता प्रदान करें। अशोक कुमार मिश्र ने पत्नी सहित एक पुत्र और एक पुत्री के साथ भाई बहन सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए।




