कल निकाला जाएगा दसवीं मुहर्रम की ताजिया जुलूस

Palamu : दसवीं मुहर्रम को इमाम हुसैन की शहादत ताजिया जुलूस निकालकर मनाया जाता है। इमामे हुसैन की शहादत हमें जुल्म के खिलाफ हमेशा डटकर मुकाबला करना,हक के साथ हमेशा खड़े रहना व बातिल के सामने कभी सर न झुकाना बल्कि हक के लिए सर कटा देने की सीख देता है। ये बातें मौलाना अब्दुल ने कहीं।

उन्होंने कहा की पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमामे हुसैन कर्बला में हक के लिए ही अपने 72 साथियों के साथ मुहर्रम के दसवीं तारीख को शहीद हो गए थे। कर्बला की जंग किसी हुकूमत हासिल करने के लिए नहीं थी न ही सर बुलंदी के लिए थी बल्कि हक व बातिल का मुकाबला था जिसमें हजरत इमामे हुसैन ने बातिल याजीद के सामने सर झुकाना पसंद नहीं किया बल्कि हक के लिए सर कटाना पसंद किया, जो हमें हमेशा सीख देती हैं की बातिल का डटकर मुकाबला करो और हमेशा हक व सच के साथ खड़े रहो।

साथ ही उन्होंने हर मुश्किल वक्त में खुदा की इबादत करना भी सिखलाया। उन्होंने कर्बला के जंग में भी खुदा की इबादत नहीं छोड़ी। जंग के मैदान में ही नमाज पढ़ते वक्त सजदे में उन्हें शहीद कर दिया गया।उन्होंने कहा की इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम है।

दसवीं मुहर्रम को मुस्लिम समुदाय के लोग इमामे हुसैन की याद में ताजिया जुलूस निकालने के साथ उनके नाम से फातिहा कर गरीबों में भोजन व रुपये दान करते हैं। रोजे भी रखते हैं और नफील नमाजे व कुरान पढ़कर इबादत करते हैं।

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