छतरपुर : आवास के नाम पर अवैध वसूली का खेल, सिल्दाग पंचायत में मुखिया और स्वयंसेवक पत्नी पर गंभीर आरोप, सभी वार्डो व ग्रामीणों में आक्रोश

2 साल बाद भी नहीं मिला घर, 5 से 10 हजार तक की अवैध वसूली का आरोप, कर्ज और धमकी के बीच जी रहे लाभुक

Palamu : पलामू जिला स्थित छतरपुर प्रखंड के सिल्दाग पंचायत में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पंचायत के मुखिया उमेश यादव, उनकी स्वयंसेवक पत्नी कुसुम देवी एवं पंचायत सचिव पर योजनाओं में धांधली, घूसखोरी और लाभुकों के शोषण के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन अब तक न तो निष्पक्ष जांच हुई है और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई। ताजा मामले में पंचायत के सभी वार्ड सदस्यों और ग्रामीणों ने खुलकर विरोध जताते हुए पंचायती राज विभाग एवं बीडीओ को आवेदन सौंपा है।

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री/अबुआ आवास योजना समेत कई योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। आरोप है कि जरूरतमंद लाभुकों से 10 से 20 हजार रुपये तक लेकर भी उन्हें आवास नहीं दिया गया, जबकि कुछ परिवारों को तीन-तीन अलग-अलग योजनाओं में आवास दे दिए गए।ग्रामीणों ने इस पर गंभीर सवाल उठाया है कि यदि एक ही परिवार को तीन-तीन आवास मिल जाता है, तो क्या यह केवल उस लाभुक की गलती है? क्या सत्यापन, जियो-टैगिंग और भुगतान प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों एवं कर्मियों की कोई जिम्मेदारी नहीं है? उनका कहना है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इस तरह की गड़बड़ी संभव नहीं है, फिर भी कार्रवाई सिर्फ लाभुकों पर ही “रिकवरी” के नाम पर क्यों की जाती है।

शिकायत में यह भी आरोप है कि कई मामलों में लाभुकों के खातों में आई सरकारी राशि को दबाव बनाकर UPI के माध्यम से वापस संबंधित लोगों के खाते में ट्रांसफर कराया गया। विरोध करने पर लाभुकों को डराया-धमकाया जाता है और उन्हीं पर कार्रवाई का दबाव बनाया जाता है।ग्रामीणों ने इसे एक संगठित भ्रष्टाचार करार देते हुए कहा कि पहले लाभुकों से पैसे लेकर योजना का लाभ दिया जाता है और जब कोई आवाज उठाता है तो उसी लाभुक को दोषी ठहराकर रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है, जबकि असली जिम्मेदारों को क्लीन चिट मिल जाती है।स्थिति यह है कि कई गरीब परिवार, जो कर्ज लेकर घूस देने को मजबूर हुए, आज उसी कर्ज को चुकाने के लिए मजदूरी कर रहे हैं। यह न केवल आर्थिक शोषण है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला भी है।

पीड़ितों की दर्दनाक कहानी

वार्ड संख्या 03 (अंधारीबाग) की कौशल्या देवी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पति प्रसाद भुइयां के साथ मिलकर 10 प्रतिशत ब्याज पर 10,000 रुपये कर्ज लेकर दिए, लेकिन आज तक उन्हें आवास नहीं मिला। अब महाजन द्वारा लगातार प्रताड़ना और मारपीट की धमकी दी जा रही है, जबकि उनके पति ईंट-भट्टा में मजदूरी कर किसी तरह परिवार चला रहे हैं।वहीं वार्ड संख्या 07 (चौखड़ा) की प्रतिमा देवी (पति कृष्ण यादव) ने बताया कि उनसे करीब दो वर्ष पूर्व 10,000 रुपये लिए गए थे, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।इसी तरह वार्ड संख्या 03 की लीलावती देवी ने भी बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर पैसे दिए, लेकिन दो साल बाद भी आवास नहीं मिला। उनका परिवार आज कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और जीविका के लिए मजदूरी करने को मजबूर है।ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक-दो मामले नहीं, बल्कि दर्जनों लोगों से इसी तरह पैसे लिए गए हैं और पिछले दो वर्षों से उन्हें सिर्फ टाल-मटोल और झूठे आश्वासन दिए जा रहे है।

ग्रामीणों और सभी वार्ड सदस्यों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और जमीनी जांच कराई जाए। साथ ही केवल लाभुकों पर ही नहीं, बल्कि योजना की प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों, कर्मियों और जियो-टैगिंग से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।फिलहाल,सभी वार्ड सदस्यों द्वारा दिए गए आवेदन पर प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में ऐसे कई और मामले हैं, जिन्हें परत-दर-परत उजागर किया जाएगा और पीड़ितों के सबूत भी सार्वजनिक किए जाएंगे।अब बड़ा सवाल यही है—क्या गरीबों के सपनों का घर भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा, या इस बार दोषियों पर कार्रवाई होगी?

United Palamu

यूनाइटेड पलामू के डिजिटल टीम के द्वारा इस न्यूज़ को पूरी तरह से जांच परख कर तैयार किया गया है। उक्त टीम के द्वारा तथ्यों का गहन विश्लेषण करने के बाद न्यूज़ तैयार किया जाता है। न्यूज़ पोस्ट करने के पूर्व उसकी गहन समीक्षा की जाती है। तत्पश्चात न्यूज़ पोस्ट किया जाता है।

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