
झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस व जेल हिरासत में मौत-रेप मामलों में न्यायिक जांच अनिवार्य की
Ranchi : झारखंड उच्च न्यायालय ने पुलिस हिरासत, जेल में मौत और रेप की घटनाओं में न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) को अनिवार्य कर दिया है।मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने आदेश दिया कि अब ऐसे सभी मामलों में ज्यूडिशियल इंक्वायरी अनिवार्य होगी। पहले इन मामलों की जांच एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से कराई जाती थी।

कोर्ट ने अपने आदेश में झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी (झालसा) को जेल, पुलिस कस्टडी में मौत या रेप के मामले में नेशनल ह्यूमन राइट कमिशन नई दिल्ली ( एनएचआरसी) की गाइडलाइन के तहत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी ) तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि ऐसे मौत और रेप के मामलों की जांच का कार्यान्वयन सही ढंग से हो।
खंडपीठ ने सरकार की ओर से दिए गए 250 ऐसे मामले जिनमें ज्यूडिशियल इंक्वायरी नहीं हुई है। उसमें जिला जज कारण बताते हुए उच्च न्यायालय को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने सरकार को पुलिस, जेल कस्टडी में ऐसे मौत या रेप के मामले के संबंध में कई अन्य दिशा निर्देश भी दिए हैं। पूर्व में कोर्ट ने प्रार्थी एवं राज्य सरकार का पक्ष जानने के बाद सुनवाई पूरी करते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया था।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब अंसारी ने पक्ष रखा था। उनकी ओर से कोर्ट के समक्ष लिखित बहस प्रस्तुत किया गया था। साथ ही उच्चतम न्यायालय के जजमेंट,राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), नई दिल्ली की ओर से जारी दिशा-निर्देश के अलावा बीएनएसएस का 196 सब सेक्शन (2) को भी कोर्ट को समर्पित समर्पित किया गया था।



