कारगिल विजय दिवस के प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित शिशु विद्या मंदिर के संस्कारों की सराहना की गई
Palamu : सरस्वती विद्या मंदिर, मेदनीनगर के प्रांगण में 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर टाउन हॉल में आयोजित विभिन्न देशभक्ति कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले भैया-बहनों के लिए एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

इस विशेष अवसर पर भारतीय सेना के सेवानिवृत्त वीर पूर्व सैनिकों का विद्यालय आगमन हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सैनिकों द्वारा माँ सरस्वती एवं भारत माता के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात् विद्यालय के भैया-बहनों द्वारा सुमधुर वंदना प्रस्तुत की गई।सम्मान समारोह में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर टाउन हॉल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भाषण, देशभक्ति गीत एवं अन्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागी भैया-बहनों को पूर्व सैनिकों एवं विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रशस्ति पत्र तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इस पावन अवसर पर विद्यालय की दीदी जी श्री वंदना जी एवं श्रीमती रंजना जी को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। टाउन हॉल के कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुशासित और ओजस्वी प्रदर्शन की सभी अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व सैनिकों ने कारगिल युद्ध के अपने संस्मरण एवं भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम तथा बलिदान की गाथाएं साझा कीं, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों से गुंजायमान हो उठा। अपने संबोधन में पूर्व सैनिकों ने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की शिक्षा पद्धति और इसके राष्ट्र निर्माण में योगदान पर विशेष बल दिया।उन्होंने कहा, “सरस्वती शिशु विद्या मंदिर केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि संस्कार गढ़ने की प्रयोगशाला है।
यहाँ दी जाने वाली शिक्षा विद्यार्थियों में न केवल किताबी ज्ञान भरती है, बल्कि उनमें अनुशासन, चरित्र निर्माण, मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम और सांस्कृतिक मूल्यों का बीजारोपण भी करती है।आज के इस दौर में जहाँ आधुनिकता के नाम पर संस्कार लुप्त हो रहे हैं, वहाँ विद्या मंदिर के भैया-बहन अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल पेश करते हैं। इन्हीं संस्कारों के बल पर ये बच्चे आगे चलकर देश की सीमाओं की रक्षा करने से लेकर समाज के हर क्षेत्र में भारत का नाम रोशन करेंगे।विद्यालय के प्रधानाचार्य ने आगत अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व सैनिकों की उपस्थिति और उनके ओजस्वी विचार हमारे विद्यार्थियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे। उन्होंने कहा कि विद्या मंदिर का ध्येय ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो विद्या के साथ-साथ राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष दामोदर मिश्रा, लक्ष्मी नारायण तिवारी , दयाशंकर शर्मा, सुनील कुमार सिंह, कामाख्या नारायण सिंह सहित विद्यालय के सभी आचार्य, दीदी जी, प्रबंध समिति के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में भैया-बहन उपस्थित थे।




