परम पूज्य जगतगुरु हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में प्रयागराज में 29 जुलाई को होगा गुरु दक्षिणा महोत्सव का भव्य आयोजन
Prayagraj : परम पूज्य जगतगुरु हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में गुरु दक्षिणा महोत्सव दिनांक 29 जुलाई 2026 दिन बुधवार को समय प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक होगा। सभी श्रद्धालु भक्तों से विनम्र निवेदन है कि समय का विशेष ध्यान रखते हुए आश्रम पधारे तथा गुरु दीक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को गुरु कृपा से धन्य एवं सफल बनाएं।

गुरु दीक्षा हेतु आवश्यक सूचना
जो श्रद्धालु मूल दीक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, वह कृपया 8960292928 पर संपर्क कर अपना नाम, पता एवं मोबाइल नंबर पूर्व में दर्ज करा दें, जिससे दीक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
गुरु दीक्षा का स्थान
राज राजेश्वरी महाशक्तिपीठ आश्रम चक्रसुदर्शन पुरी, धनुपुर, हंडिया, प्रयागराज।

नेशनल ओर इंटरनेशनल लेवल के प्रख्यात संत और कथावाचक हैं जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री हरिप्रपन्नाचार्य जी महाराज
बता दें कि जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री हरिप्रपन्नाचार्य जी महाराज नेशनल ओर इंटरनेशनल लेवल के प्रख्यात संत और कथावाचक हैं। वे प्रयागराज स्थित हरिहरानंद शक्तिपीठ और चक्र सुदर्शन पुरी के पीठाधीश्वर हैं। वे देश-विदेश में भागवत कथा और श्रीराम कथा के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं। वे वैष्णव परम्परा के अंतर्गत रामानुज सम्प्रदाय से जुड़े हैं। उन्हें ‘श्रीराम कथा’, ‘श्रीमद् भागवत कथा’ और ‘देवी भागवत’ जैसे ग्रंथों के मर्मज्ञ विद्वान के रूप में जाना जाता है। जगतगुरु हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज प्रतिदिन कथा कहते हैं। इस कथा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। भारत देश के कई राज्यों में उनकी कथा होती है। विदेश में भी प्रपन्नाचार्य जी महाराज बड़े ही आधार के साथ बुलाए जाते हैं।
सावन में भगवान शिव की करें पार्थिव पूजा : जगतगुरु हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज
इसी महीने 30 जुलाई से सावन महोत्सव की शुरुआत होने वाला है। पूरा देश सावन के रंग में डूब जाएगा। सावन में भोलेनाथ यानि भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। देश भर के लोग भोलेनाथ पर जल चढ़ाने के लिए बाबा बैद्यनाथ देवघर, प्रयागराज सहित कई देवालयों में उमड़ पड़ते हैं। सावन मास में भगवान शिव के पार्थिव पूजा का विशेष महत्व है। पार्थिव पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जगतगुरु हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा कि कलियुग में पार्थिव पूजा (मिट्टी के शिवलिंग की पूजा) को सबसे सरल, शीघ्र फलदायी और कल्याणकारी माना गया है। शिव पुराण के अनुसार, सांसारिक और आध्यात्मिक संकटों से मुक्ति के लिए यह सबसे अचूक उपाय है, जिसे कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ घर पर कर सकता है। शिवपुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का पूजन सदा सम्पूर्ण मनोरथों को देनेवाला हैं तथा दुःख का तत्काल निवारण करनेवाला हैं। पार्थिवप्रतिमापूजाविधानं ब्रूहि सत्तम। उन्होंने अपनी कथा में कहा कि जो पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर एक बार भी उसकी पूजा कर लेता है, वह दस हजार कल्पतक स्वर्ग में निवास करता है। पार्थिव शिवलिंग के अर्चन से मनुष्य को प्रजा, भूमि, विद्या, पुत्र, बान्धव, श्रेष्ठता, ज्ञान एवं मुक्ति सब कुछ प्राप्त हो जाता है।

जगतगुरु हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा
कृते रत्नमयं लिंगं त्रेतायां हेमसंभवम्। द्वापरे पारदं श्रेष्ठं पार्थिवं तु कलौ युगे।रामचरितमानस में पार्थिव पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने कहा कि भगवान राम ने स्वयं लंका विजय से पहले रामेश्वरम में और गंगा तट पर केवट प्रसंग के दौरान पार्थिव शिवलिंग की पूजा की थी।मानस में वर्णित यह चौपाई इसके महत्व को दर्शाती है: लिंग थापि बिधिबत् कर पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा॥




