C.B.I जांच से आखिर क्यों भाग रही है झारखंड सरकार ? छात्र आंदोलन के बीच बड़ा सवाल
छात्रों के आंदोलन पर सभी राजनीतिक दल सेक रहे हैं अपनी-अपनी रोटी !
United Palamu Reporter
Ranchi : रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के प्रदर्शन का 15 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचाना कई सवालों को खड़ा करता है। आंदोलन के शुरुआती दौर में तो सरकार कुंभकर्णी निद्रा में सोई हुई थी। अब अगर जागी भी है तो परिणाम सिफर है। झारखंड सरकार 3 मंत्रियों का ग्रुप बनाकर आंदोलनकारी छात्रों को अपने गिरफ्त में लेने का प्रयास कर रही है। अभी तक छात्र उनकी गिरफ्त में नहीं आए हैं।
छात्रों का मुख्य डिमांड है प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई जांच। सरकार आखिर सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है ? आखिर कहीं दाल में काला है तब तो ? यह तो कटु सत्य है कि जब से झारखंड बना है, तब से लेकर आज तक, राज्य में जितने भी प्रतियोगी परीक्षाएं हुई हैं, कोई भी साफ सुथरा नहीं हुआ। इस बात से हर कोई अवगत है। झारखंड में प्रतिभा शुरू से ही कुंठित रहा है। ऐसे में छात्रों का एक भी डिमांड गलत नहीं है। छात्र हित में और देश हित में यहां की प्रतियोगी परीक्षाओं का सीबीआई जांच समय की जरूरत है। ताकि प्रतिभा कुंठित न हो।
छात्र आंदोलन पर सभी दल के नेताओं का जमावड़ा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लग रहा है। इन नेताओं द्वारा छात्रों से बातचीत करके उनके दिल पर मरहम लगाया जा रहा है। जो बिल्कुल दिखावटी साबित हो रहा है। यह तो कटु सत्य है कि ये नेता सिर्फ अपनी-अपनी रोटी सेक रहे हैं और अपनी गोटी लाल कर रहे हैं। इन लोगों को छात्रों के हित से कोई लेना-देना नहीं है।

क्या कहते हैं आंदोलनकारी छात्र ?
छात्रों का कहना है कि 50 प्रतिशत से अधिक मांगों को सरकार ने स्वीकार किया है, लेकिन कई प्रमुख और निर्णायक मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है। सरकार के मंत्रियों के साथ बैठक के बाद छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। छात्र सीबीआई जांच पर अड़े हुए हैं। आमरण अनशन पर बैठे हुए देवेन्द्रनाथ महतो ने कहा कि सिर्फ मौखिक आश्वासन के आधार पर छात्रों का अनशन और आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर लिखित रूप से जवाब नहीं दिया जाता और मांगों को पूरा करने की दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी। महतो ने कहा कि छात्रों की मांगें किसी व्यक्ति विशेष के हित से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि राज्य की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने से संबंधित हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय लेने की अपील की।उन्होंने यह भी कहा कि लिखित आश्वासन और मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक सत्याग्रह और छात्र आंदोलन जारी रहेगा।
क्या कहते हैं सरकार के मुख्य वार्ताकार उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, विस्तार से जानें
छात्रों से वार्ता की अगुआई कर रहे उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार छात्रों से वार्ता करने के लिए तैयार है और उनकी अधिकांश मांगों को स्वीकार भी कर चुकी है। ऐसे में केवल सीजीएल परीक्षा को रद्द कर सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सीजीएल परीक्षा की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर से हुई है और इसकी भर्ती प्रक्रिया भी न्यायालय की निगरानी में रही है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार अपने स्तर से परीक्षा रद्द करने की स्थिति में नहीं है।मंत्री सुदीप कुमार सोनू ने राज्य भर के छात्रों और उनके अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि छात्र हठधर्मिता छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाएं। आंदोलन तब किया जाता है, जब सरकार आपकी बातें सुनने को तैयार नहीं होती। जब सरकार छात्रों की मांगों पर बातचीत कर रही है और समाधान के लिए तैयार है, तो उसे समझने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की। मंत्री ने कहा कि पिछले तीन दिनों से आंदोलनरत छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार ने तीन स्तरों पर वार्ता की। इसमें संदिग्ध परीक्षाओं की जांच, परीक्षाओं को रद्द करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार (रिफॉर्म) से संबंधित मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। जांच से जुड़े मामलों में सरकार ने जेपीएससी की गड़बड़ियों के संबंध में कई जगह छापेमारी कर कार्रवाई की है। डिजिटल दस्तावेज और साक्ष्य जब्त किए गए हैं एवं संदिग्ध लोगों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसके अलावा जेपीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों से इस्तीफा लिया गया है।उन्होंने कहा कि सरकार ने महसूस किया है कि मामला और व्यापक हो सकता है। ऐसी स्थिति में जेपीएससी से जुड़े घपले, घोटाले और अनियमितताओं की जांच सीआईडी से कराई जाएगी। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी आग्रह पत्र भेजा जाएगा, ताकि यदि कहीं आर्थिक लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो उसकी भी जांच हो सके। सरकार की मंशा किसी दोषी को बचाने की नहीं है और जांच के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
परीक्षाओं को रद्द करने की मांग पर मंत्री ने कहा कि चौथी जेपीएससी, बैकलॉग, 2023 और 2025 से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने पर सरकार सहमत हुई है। इसके अलावा टीडीपीएल संस्था की ओर से आयोजित सभी संबंधित परीक्षाओं की व्यापक और विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि जांच में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसके आधार पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।सीजीएल परीक्षा के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांग परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच कराने की है। लेकिन चूंकि पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई है, इसलिए राज्य सरकार के लिए फिलहाल इसे रद्द करना संभव नहीं है। बावजूद इसके सरकार ने पूरे मामले की जांच प्रक्रिया की निगरानी के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में रिफॉर्म के मुद्दे पर भी सरकार करीब 98 फीसदी मांगों पर सहमत हो चुकी है। इसके लिए आईआईएसएम, आईआईएम और जमशेदपुर के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों की विशेषज्ञ सेवाएं ली जाएंगी। इसमें स्टेकहोल्डर के रूप में छात्रों से भी सुझाव लिए जाएंगे। सरकार ने ई-मेल के माध्यम से भी सुझाव मांगे हैं।मंत्री ने कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद छात्र सीजीएल परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं, जिसके कारण समझौता वार्ता टूट गई। उन्होंने छात्रों से अपील की कि सरकार ने जिन मांगों को स्वीकार किया है, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत पूरा करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में आंदोलन का रास्ता छोड़कर संवाद के माध्यम से अपनी बातें सरकार के समक्ष रखी जाएं।



