झारखंड पुलिस एसोसिएशन 8 सितंबर से विधायक जयराम के खिलाफ छेड़ेगा जोरदार आंदोलन
Ranchi : झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने पुलिसकर्मियों के मान-सम्मान और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर आंदोलन की घोषणा की। आंदोलन की शुरुआत 08 सितंबर से होगी और मांगें पूरी नहीं होने पर 05 अक्टूबर से छह दिनों का सामूहिक अवकाश लिया जाएगा।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि हाल के दिनों में थाना, ओपी और वाहिनी में पदस्थापित कनीय पुलिस पदाधिकारियों के साथ गाली-गलौज, मारपीट और धमकी की घटनाएं सामने आ रही हैं। धनबाद के बरवाअड्डा थाना में डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और उनके समर्थकों पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित अमर्यादित व्यवहार, धक्का-मुक्की, सरकारी कार्य में बाधा और थाना हाजत से आरोपित को छुड़ाने के प्रयास का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है।

एसोसिएशन का आरोप है कि पुलिस एसोसिएशन की ओर से कार्रवाई की मांग किए जाने के बाद भी अपेक्षित न्याय नहीं मिला। इसके अलावा विधायक की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से एसोसिएशन को लेकर कथित अमर्यादित टिप्पणी और धमकी दिए जाने से पुलिसकर्मियों में नाराजगी है।
पुलिस एसोसिएशन के अनुसार 8 से 11 सितंबर तक पुलिसकर्मी वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करेंगे। इसके बाद 19 सितंबर को सामूहिक उपवास किया जाएगा। इस दौरान पुलिस केंद्र, थाना और ओपी में मेस बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
24 सितंबर को जिला और इकाई स्तर पर पुलिस अधीक्षक या समादेष्टा कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरना दिया जाएगा। वहीं एसोसिएशन के केंद्रीय पदाधिकारी डीजीपी कार्यालय के समक्ष धरना देंगे और इसके बाद ज्ञापन सौंपेंगे। मांगें पूरी नहीं होने पर 05 से 10 अक्टूबर तक छह दिनों का सामूहिक अवकाश लेने का निर्णय लिया गया है।
एसोसिएशन ने पुलिसकर्मियों के लिए 9 सूत्री मांगें रखी हैं। इनमें बरवाअड्डा मामले में आरोपित विधायक की नियमानुसार जल्द गिरफ्तारी, वर्दी और राशन भत्ता बढ़ाने, सातवें वेतनमान के अनुरूप विभिन्न भत्तों का पुनरीक्षण, दो बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता और स्वास्थ्य भत्ता शामिल है।
इसके अलावा 10 वर्ष से अधिक समय से एक ही जिला या इकाई में पदस्थापित पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण, समय पर पदोन्नति और पुलिस के काम में जनप्रतिनिधियों के अनैतिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए कानून और कार्रवाई का प्रावधान करने की मांग की गई है।



