
कांग्रेस नेत्री पूर्णिमा पांडेय ने NEET में अव्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा : क्या यही है BJP सरकार की नई शिक्षा नीति ?
Palamu : कांग्रेस पार्टी की प्रदेश सचिव श्रीमती पूर्णिमा पाण्डेय ने NEET (UG)-2026 की परीक्षा रद्द होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- NEET UG 2026 सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी।
यह 22 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों के सपनों, संघर्षों और उम्मीदों की परीक्षा थी।इन लाखों छात्रों में बड़ी संख्या उन बच्चों की है जो ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं।
कई ऐसे परिवार होंगे जिन्होंने आर्थिक तंगी के बावजूद अपने बच्चों का फॉर्म भरवाया।
किसी पिता ने मजदूरी करके पैसे जुटाए होंगे, किसी मां ने अपने गहने गिरवी रखे होंगे, तो किसी परिवार ने कर्ज लेकर अपने बच्चे को तैयारी कराई होगी।

कई छात्रों ने एक साल ड्रॉप लिया, कई ने दो-दो साल तक खुद को कमरे में बंद रखकर सिर्फ पढ़ाई की।कुछ ऐसे भी होंगे जिन्होंने अपनी युवावस्था के सबसे महत्वपूर्ण साल इस उम्मीद में लगा दिए कि मेहनत के दम पर उनका चयन हो जाएगा।लेकिन आज वही छात्र सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जो छात्र इस बार अच्छा स्कोर ला रहे थे, उन्हें डर है कि अगर दोबारा परीक्षा हुई तो शायद वे वैसा प्रदर्शन न कर पाएं।
जो छात्र कटऑफ के आसपास थे, उन्हें डर है कि अगली बार कुछ नंबर कम रह जाएंगे। जो गरीब छात्र किसी तरह तैयारी कर पाए थे, उनके लिए दोबारा वही संघर्ष करना लगभग असंभव होगा।सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी हुई, तो उसकी सजा ईमानदार छात्रों को क्यों मिले? यह सिर्फ किसी एजेंसी की तकनीकी विफलता नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की गंभीर असफलता है।
और इस असफलता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की बनती है।जब देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा बार-बार विवादों में आए, पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगें, पारदर्शिता पर सवाल उठें — तो यह सीधे तौर पर सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
National Testing Agency पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है।अगर देश के लाखों युवा किसी परीक्षा एजेंसी पर विश्वास नहीं कर पा रहे, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है।दूसरी तरफ, Indian Institutes of Technology द्वारा आयोजित परीक्षाओं की विश्वसनीयता अपेक्षाकृत मजबूत रही है।
इससे साफ दिखता है कि अगर इच्छाशक्ति और जवाबदेही हो, तो निष्पक्ष परीक्षा कराना संभव है।
पूर्णिमा पांडेय ने कहा कि आज देश के छात्र सिर्फ एक चीज मांग रहे हैं : निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही।अगर सरकार युवाओं का भरोसा नहीं बचा पाती, तो यह केवल एक परीक्षा की विफलता नहीं होगी, बल्कि देश के भविष्य के साथ अन्याय होगा।अब समय आ गया है कि शिक्षा मंत्रालय और सरकार छात्रों व अभिभावकों से जवाब मांगे जाने के बजाय खुद जवाब दे।देश के 22 लाख छात्र सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था चाहते हैं।




