
Palamu : पोस्टमार्टम हाउस की बदहाल व्यवस्था, डीप फ्रीजर खराब होने से शवों के सुरक्षित रखरखाव पर गंभीर संकट
घंटों धूप में खड़े रहते हैं मृतकों के परिजन, प्रशासन बेखबर
Upendra Kumar Papu
Palamu : मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल का हाल इन दिनों बेहाल है। अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर शेड व बैठने की जगह नहीं होने के कारण परिजनों को भीषण धूप में खुले में घंटों खड़ा रहना पड़ता है। पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों को मूलभूत सुविधाएं न मिलना, उनके दुख को और बढ़ा देता है।यहां की व्यवस्थाओं की हालत इतनी खराब है कि बुनियादी सुविधाएं तक ठीक से काम नहीं कर रही हैं।
सबसे गंभीर समस्या यह है कि पोस्टमार्टम हाउस में लगा डीप फ्रीजर लंबे समय से खराब पड़ा हुआ है, जिसके कारण शवों को सुरक्षित रखने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।जानकारी के अनुसार, डीप फ्रीजर खराब होने की वजह से शवों को उचित तापमान में संरक्षित नहीं किया जा पा रहा है। ऐसे में शवों को मजबूरी में पंखे के नीचे रखा जा रहा है, जो कि स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश करता है। यह स्थिति न सिर्फ पोस्टमार्टम हाउस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से यहां सुविधाओं की कमी और लापरवाही का आलम बना हुआ है। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद भी अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि इतनी महत्वपूर्ण जगह पर भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।पोस्टमार्टम हाउस जैसी जगह पर शवों के सुरक्षित रखरखाव के लिए डीप फ्रीजर का सही स्थिति में होना बेहद जरूरी होता है, लेकिन इसकी अनदेखी से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इससे न केवल कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि आने वाले परिजनों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को तुरंत संज्ञान में लिया जाए। डीप फ्रीजर की तत्काल मरम्मत कराई जाए और पोस्टमार्टम हाउस में सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो यह लापरवाही किसी बड़े संकट का कारण बन सकती है। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक कार्रवाई करता है।



