एमएसीपी पर विभागीय आदेश सरकार के वादों के विपरीत : झारोटेफ़

Latehar : झारखंड ऑफिसर्स, टीचर्स एंड एम्प्लॉइज फेडरेशन (झारोटेफ़ ) के आह्वान पर सोमवार को जिले भर में “एमएसीपी अधिकार – प्रतिवाद दिवस” का सफल आयोजन किया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों में शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यस्थलों पर लंच आवर के दौरान एकत्र होकर शिक्षा विभाग द्वारा जारी उस आदेश के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक ढंग से विरोध-प्रदर्शन किया, जिसमें शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों की तरह एमएसीपी का लाभ देने से वंचित रखा गया है।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने विभागीय आदेश की प्रतीकात्मक प्रति जलाकर सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया। साथ ही ट्विटर (X), फेसबुक एवं इंस्टाग्राम सहित विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर अभियान चलाकर अपनी बात राज्य सरकार एवं आम जनता तक पहुंचाई।

घोषणा-पत्र और सरकारी आश्वासन के विपरीत विभागीय निर्णय

महासंघ ने कहा कि सत्तारूढ़ दल ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों की भांति एमएसीपी का लाभ देने का स्पष्ट वादा किया था। इसके अलावा विधानसभा के पिछले सत्रों में भी सरकार की ओर से इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश न केवल सरकार के आश्वासनों की भावना के विपरीत है, बल्कि घोषणा-पत्र से भी असंगत है।

महासंघ का कहना है कि सरकार के सार्वजनिक आश्वासनों और विभागीय निर्णयों के बीच इस प्रकार का विरोधाभास राज्य के लाखों शिक्षकों एवं कर्मचारियों के विश्वास को ठेस पहुंचाता है।

जिला अध्यक्ष ने क्या कहा

झारोटेफ़ के जिला अध्यक्ष हीरा प्रसाद यादव ने कहा कि शिक्षकों को एमएसीपी से वंचित रखने का निर्णय न तो न्यायसंगत है और न ही संवैधानिक समानता की भावना के अनुरूप। जब सरकार विधानसभा में सकारात्मक आश्वासन दे चुकी है और सत्तारूढ़ दल ने अपने घोषणा-पत्र में MACP देने का वादा किया था, तब शिक्षा विभाग का यह आदेश पूरी तरह विरोधाभासी एवं निराशाजनक है। उन्होंने सरकार से तत्काल आदेश की समीक्षा कर शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों की तरह MACP का लाभ देने की मांग की।

जिला सचिव का बयान

महासंघ के जिला सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि राज्यव्यापी प्रतिवाद कार्यक्रम यह स्पष्ट संदेश देता है कि शिक्षक एवं कर्मचारी अपने अधिकारों के मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि संगठन का आंदोलन किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय, समानता और सरकार द्वारा किए गए वादों को लागू कराने के लिए है। संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर अपने संघर्ष को अंतिम मुकाम तक पहुंचाएगा।

महासंघ ने जिला, प्रखंड एवं विद्यालय स्तर के सभी पदाधिकारियों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यक्रम की सफलता के लिए धन्यवाद दिया तथा राज्य सरकार से शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश को तत्काल वापस लेकर शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों की भांति MACP का लाभ देने की मांग दोहराई।

महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो संगठन अपने पूर्व घोषित चरणबद्ध आंदोलन को और तेज करेगा तथा “पाएं अपना अधिकार, चलो मुख्यमंत्री के द्वार” के आह्वान के साथ राज्य के हजारों शिक्षकों, कर्मचारियों एवं अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री आवास तक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक मार्च निकालेगा।

कार्यक्रम में संजीव कुमार चंद्र, नरेंद्र कुमार पांडेय, तृप्ति भारती, दशरथ सिंह, संतोष पासवान, लक्ष्मी कुमारी, मनीष कुमार, अमित कुमार, संदीप पासवान, अभिमन्यु कुमार सिंह, गोविंद पासवान, विजय लाल, उमेश कुमार सिंह, धीरज कुमार, दिलीप कुमार सिंह, विजय प्रकाश गुप्ता, प्रेम यादव, लॉरेंस भेंगड़ा, निरंजन उरांव, अनिल यादव सहित जिले भर के बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लिया।

United Palamu

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