
हुसैनाबाद : एके सिंह कॉलेज में टकराव चरम पर, 12वें दिन भी धरने पर डटे शिक्षकेतर कर्मचारी
Palamu : हुसैनाबाद जपला स्थित एके सिंह कॉलेज में शिक्षकेतर कर्मचारियों और महाविद्यालय प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। विभिन्न मांगों को लेकर 30 मई से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को 12वें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने धरनास्थल पर एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी लंबित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
धरनारत कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों से उनकी सेवा संबंधी समस्याओं, अधिकारों और कार्य परिस्थितियों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि सम्मानजनक कार्य वातावरण, सेवा शर्तों में सुधार तथा वेतनमान समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर कई बार कॉलेज प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। प्रशासन की इसी उदासीनता के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता कर्मचारियों के आक्रोश को और बढ़ा रही है, जिससे कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।धरने में रमेश सिंह, जयराम सिंह, अशोक कुमार सिंह, अनिकराज पाल, नरेंद्र कुमार सिंह, अखिलेश्वर सिंह, अमित कुमार, सुनील कुमार सिंह, प्रहलाद पाल, मीना गुप्ता, अर्चना कुमारी, नीतीश कुमार पटेल और कृष्णमोहन सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षकेतर कर्मचारी मौजूद रहे।
इधर, आंदोलन लंबा खिंचने से कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने लगा है। छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के बीच पढ़ाई, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक कार्यों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों और प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी से कॉलेज का शैक्षणिक माहौल प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।कॉलेज परिसर में उत्पन्न गतिरोध को देखते हुए शिक्षाविदों और अभिभावकों का मानना है कि दोनों पक्षों को जल्द संवाद की पहल करनी चाहिए, ताकि समाधान का रास्ता निकल सके और शिक्षण व्यवस्था सामान्य बनी रहे। फिलहाल 12 दिनों से जारी यह आंदोलन कॉलेज प्रशासन और कर्मचारियों के बीच गहराते अविश्वास की तस्वीर पेश कर रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस टकराव को समाप्त करने के लिए पहल कौन करता है और समाधान की राह कब निकलती है।




