
हुसैनाबाद : माइंस के गड्ढे में डूबे युवक का सुराग नहीं, फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने किया सड़क जाम
एनडीआरएफ टीम बुलाने, गड्ढों की घेराबंदी करने और मुआवजे की मांग
माइंस संचालक व अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
Palamu : हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के सोहया पहाड़ स्थित दमदमी गांव के समीप माइंस के गहरे पानी भरे गड्ढे में डूबे युवक का देर शाम तक कोई सुराग नहीं मिलने पर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने चौवा चट्टान के चौहान मोड़ के पास तथा सामुडीह मोड़ (इमलीतर) के समीप जपला-छतरपुर मुख्य सड़क को दो स्थानों पर जाम कर दिया। जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।
जानकारी के अनुसार पतरा खुर्द निवासी सत्येंद्र प्रसाद के 24 वर्षीय पुत्र लवकुश कुमार गुप्ता बुधवार को माइंस के गहरे जलभराव वाले गड्ढे में डूब गए थे। घटना के बाद से स्थानीय गोताखोरों द्वारा लगातार खोजबीन की जा रही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका शव बरामद नहीं हो सका था।

घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी चंदन कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और खोज अभियान की निगरानी कर रहे हैं। वहीं अंचल अधिकारी पंकज कुमार भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर तलाश अभियान जारी है।
इधर, युवक का शव नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने सड़क जाम कर एनडीआरएफ टीम बुलाने, माइंस क्षेत्र में बने खतरनाक गड्ढों की घेराबंदी कराने तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
डूबे युवक के चाचा सुकेंद्र साहू तथा दमदमी पहाड़ बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रामकेश्वर महतो ने माइंस संचालकों और जिला खनन विभाग (डीएमओ) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि माइंस क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की गई, जिसके कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही और माइंस संचालकों की मनमानी के चलते क्षेत्र में जानलेवा स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी पानी से भरे इन गड्ढों में कई मवेशियों की मौत हो चुकी है, लेकिन सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। युवक के डूबने की घटना के बाद एक बार फिर माइंस संचालन की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
फिलहाल पुलिस, प्रशासन और स्थानीय गोताखोरों की टीम युवक की तलाश में जुटी हुई है। पूरे क्षेत्र में तनाव और चिंता का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।



