एनपीयू के साथ अंगीभूत महाविद्यालयों के वित्तीय मामलों की भी हो उच्चस्तरीय जांच : आपसू
Palamu : नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के बाद अब विश्वविद्यालय के साथ-साथ उसके अंगीभूत महाविद्यालयों के वित्तीय मामलों की भी उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है।

अखिल पलामू छात्र संघ (आपसू) के जिलाध्यक्ष राजीव रंजन ने झारखंड के मुख्यमंत्री, माननीय कुलाधिपति सह राज्यपाल एवं वित्त मंत्री से पूरे मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए विशेष वित्तीय जांच/अंकेक्षण कराने की मांग की है।राजीव रंजन ने कहा कि विश्वविद्यालय में विशेष अंकेक्षण के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले सामने आने के बाद केवल विश्वविद्यालय स्तर तक कार्रवाई सीमित रखना पर्याप्त नहीं है।मार्च 2025 से वर्तमान तक विश्वविद्यालय एवं उससे जुड़े अंगीभूत महाविद्यालयों में हुए बड़े वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सार्वजनिक राशि का उपयोग निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं।
उन्होंने कहा कि जनता शिवरात्रि महाविद्यालय,एसएसजेएसएन कॉलेज गढ़वा, जीएलए कॉलेज, वाईएसएनएम कॉलेज एवं मनिका डिग्री कॉलेज के साथ-साथ विश्वविद्यालय से जुड़े अन्य संस्थानों के भी खरीद, निर्माण, मरम्मत, उपकरण, परीक्षा सामग्री, फर्नीचर, अनुदान एवं अन्य मदों में किए गए भुगतान की जांच होनी चाहिए।आपसू जिलाध्यक्ष ने कहा कि विशेष रूप से सभी बड़े भुगतान के बिल-वाउचर, निविदा प्रक्रिया, स्वीकृति आदेश, स्टॉक रजिस्टर, बैंक/ट्रेजरी भुगतान एवं वास्तविक कार्य या सामग्री का भौतिक एवं दस्तावेजी मिलान कराया जाए। यदि कहीं सरकारी या विश्वविद्यालय की राशि के दुरुपयोग अथवा नियम विरुद्ध भुगतान की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के साथ राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।राजीव रंजन ने कथित IPS संस्थान को लेकर भी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि संस्थान की वैधता,विश्वविद्यालय से उसके संबंध, वित्तीय लेन-देन एवं संबंधित अभिलेखों की जांच होनी चाहिए। साथ ही संस्थान के निदेशक एवं संबंधित व्यक्तियों की आय और संपत्ति का सक्षम वैधानिक एजेंसी से परीक्षण कराया जाए। यदि जांच में आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में संपत्ति में असंगति सामने आती है तो नियमानुसार आय से अधिक संपत्ति के कोण से भी जांच की जाए।
उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति को पहले से दोषी ठहराने का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन और शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने का सवाल है।आपसू ने मुख्यमंत्री, कुलाधिपति एवं वित्त मंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र उच्चस्तरीय वित्तीय जांच/विशेष अंकेक्षण का आदेश दिया जाए और जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा एजेंसियों के विरुद्ध बिना किसी दबाव के विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।




