कुटकू डूब क्षेत्र शहीद निलाम्बर-पिताम्बर सघर्ष समिती ने विस्थापन को लेकर किया धरना-प्रदर्शन
Gadhwa : आदिवासी आगुआ आशुतोष सिह चेरो ने निलाम्बर-पिताम्बर के जन्मभूमि कूटकु डूब क्षेत्र को विस्थापन से बचाने का आह्वान किया। गढवा जिला मुख्यालय के समक्ष कुटकू डूब क्षेत्र शहीद निलाम्बर-पिताम्बर सघर्ष मोर्चा के तत्वावधान मे विस्थापन को लेकर विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। राज्य के हर क्षेत्र से आऐ आदिवासी जन नेता विस्थापन मुद्दे को लेकर हुंकार भरा। बताते चले कि कूटकू डूब क्षेत्र वीर शहीद निलाम्बर-पिताम्बर के गांव एव आसपास क्षेत्र के गांव को विस्थापित करने पर वर्तमान केंद्र की सरकार एव राज्य की सरकार तुली है। जिसको लेकर विस्थापित हो रहे निलाम्बर-पिताम्बर के वंशज एव ग्रामीण अपनी विस्थापन को लेकर जिला मुख्यालय समाहरणालय परिसर के समकक्ष अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया।

ग्रामीणो का कहना है कि हमारे पुरखा वीर शहीद निलाम्बर-पिताम्बर देश के आजादी के लिए अंग्रेजो से लड़े। ना कि वर्तमान की केन्द्र एव राज्य की सरकार से।आखिर क्यो हमारे वीर शहीदो के गावो को सरकार उजाडने मे लगी है। अंग्रेजो ने डैम का 1928 ई.में नीव इसलिए रखी ताकि निलाम्बर-पिताम्बर के इतिहास को मिटाया जा सके। आज की वर्तमान सरकार अंग्रेजो के निती पर काम कर रही है। ग्रामीण अपने जन्मभूमि जल, जगंल और जमीन को छोड कर नही जाना चाहते। सरकार और जिला प्रशासन जबरन विस्थापित करने मे लगी है।
आदिवासी नेता झारखंडी आदिवासी बचाओ सघर्ष समिती के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष सिह चेरो ने कहा कि वीर शहीद निलाम्बर-पिताम्बर के जन्मभूमि एव आसपास क्षेत्र को सरकार द्वारा विस्थापित कर वीर शहीदो के इतिहास के पेन्नो से गायब करने लगी है।पूर्व मंत्री देव कुमार धान ने कहा की राज्य मे विस्थापन एक गम्भीर मुद्दा बनते जा रहा है। राज्य और केन्द्र की सरकार की विकास आदिवासी के जंगलो से होकर गुजर रहा है। प्रेमशाही मुंडा, आदिवासी जन परिषद के अध्यक्ष ने कहा की वर्तमान सरकार के द्वारा निलाम्बर-पिताम्बर के गांव को विस्थापित करना हमारे इतिहास से छेडछाड करने जैसा प्रतित होता है।
दर्शन गझू, अध्यक्ष खरवार भोक्ता समाज विकास संघ ने कहा कि निलाम्बर-पिताम्बर के गांव को विस्थापित कर निलाम्बर-पिताम्बर को इतिहास के पन्नो से गायब करने की साज़िश है। हम सभी जनजाति को जगना होगा और उलगुलान करना होगा। धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम मे विस्थापित गांव के ग्रामीणएव जिले के जनजाति काफी सख्या मे माता बहने अपनी की उपस्थिती दर्ज कर विरोध किए।



