
नगर नदी पर पुल नहीं होने से ग्रामीण परेशान, 10 दिनों से बच्चों की पढ़ाई बाधित

लातेहार : चंदवा प्रखंड की चकला पंचायत में नगर नदी पर पुल नहीं होने से बरसात के दिनों में हजारों ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही चकला पूरण टोली समेत कई टोलियों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और मरीजों को हो रही है। नदी में पानी बढ़ने के कारण पिछले करीब 10 दिनों से कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। वहीं, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ता है।
चकला पूरण टोली से चोटरो कुसुम टोली, अराधे भुसार देवी मंडप, नवा टोली, अम्बा ताड़, अरंडिया ताड़ और भीखू टोली को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर मंगरदाह के समीप नगर नदी पर वर्षों से पुल निर्माण की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बरसात में यही समस्या उत्पन्न होती है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।
आजसू नेता मनोज तुरी ने कहा कि नगर नदी पर पुल नहीं होना ग्रामीणों के लिए वर्षों से बड़ी समस्या बनी हुई है। बरसात में नदी उफान पर आने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय पुल निर्माण का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन चुनाव के बाद समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता।
मनोज तुरी ने कहा कि वर्तमान विधायक प्रकाश राम ने भी विधानसभा चुनाव के दौरान ग्रामीणों को पुल निर्माण का आश्वासन दिया था। ग्रामीण अब उस आश्वासन के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने तथा स्थायी पुल बनने तक सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की।
ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन सैकड़ों बच्चे इसी मार्ग से चंदवा के विभिन्न स्कूलों में जाते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर अभिभावक बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल भेजने से बचते हैं। इसके अलावा आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने कहा कि नगर नदी पर पुल की मांग वर्षों पुरानी है। कई बार आवेदन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थायी पुल निर्माण कराने की मांग की है।
मौके पर आजसू नेता मनोज तुरी, प्रभु तुरी, सहजन तुरी, बंधन मुंडा, श्याम मुंडा, रामू मुंडा, रामदास मुंडा समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे।





