एके सिंह कॉलेज में बवाल: कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, प्राचार्य पर तानाशाही का आरोप, 30 मई से धरना का ऐलान

हुसैनाबाद : एके सिंह कॉलेज, जपला में शिक्षकेतर कर्मचारियों और महाविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। कर्मचारियों ने प्राचार्य पर तानाशाही रवैया अपनाने, अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने तथा वेतनमान संबंधी मुद्दों पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

इस संबंध में कर्मचारियों ने कॉलेज के सचिव को ज्ञापन सौंपकर 30 मई 2026 से धरना-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है।

कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से महाविद्यालय में सेवा दे रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित मानदेय और वेतन का लाभ नहीं मिल सका है। ऐसे में हाल ही में प्रस्तावित नए वेतनमान को वर्तमान शिक्षकेतर कर्मचारियों पर लागू करना उनके हितों के विरुद्ध होगा। उन्होंने मांग की है कि नया वेतनमान केवल भविष्य में नियुक्त होने वाले कर्मियों पर ही लागू किया जाए।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने प्राचार्य पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों के अनुसार वेतन स्लैब की जानकारी मांगने पर प्राचार्य ने नाराजगी जताते हुए नौकरी से निकालने की धमकी दी तथा अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। कर्मचारियों का दावा है कि पूरी घटना कॉलेज परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में दर्ज है।इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कुलपति को भेजे गए आवेदन की प्रतिलिपि देखकर प्राचार्य ने विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद के प्रति भी अभद्र टिप्पणी की। वहीं सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग करने पर कर्मचारियों को ही अनुशासनहीनता का नोटिस देने की बात कही गई।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज में स्टाफ काउंसिल की बैठक और शिक्षक प्रतिनिधि का चुनाव जानबूझकर नहीं कराया जाता, जिससे कर्मचारियों की आवाज दबाई जा सके और शासी निकाय को वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ रखा जा सके।शिक्षकेतर कर्मचारियों ने सचिव से मांग की है कि वर्तमान कर्मियों पर नया वेतनमान लागू करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा प्राचार्य के व्यवहार, कथित अभद्र टिप्पणियों और प्रशासनिक कार्यशैली की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 30 मई 2026 से कॉलेज परिसर में लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रशासन की होगी।

ज्ञापन की प्रतिलिपि स्थानीय सांसद सह शासी निकाय अध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी हुसैनाबाद, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि, कुलसचिव नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय सहित शासी निकाय के अन्य सदस्यों को भी भेजी गई है।समस्त शिक्षकेतर कर्मचारियों के इस कदम से कॉलेज परिसर का माहौल गर्म हो गया है और अब सभी की नजरें महाविद्यालय प्रशासन एवं शासी निकाय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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