एनटीपीसी कोयला परियोजना की जनसुनवाई का ग्रामीणों ने किया विरोध,ग्राम सभा की सहमति के बिना काम न करने की मांग

Sanjay prajapati @ united palamu

Latehar: बालूमाथ प्रखंड के उत्तरी धाधू (पूर्वी भाग) एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना के लिए सोमवार को आयोजित पर्यावरणीय स्वीकृति की लोक सुनवाई को प्रभावित ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते बीच में ही रोकना पड़ा। बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में हुई इस जनसुनवाई में हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना को रद्द करने की मांग की।

जनसुनवाई में क्या हुआ


कार्यक्रम की अध्यक्षता लातेहार के अपर समाहर्ता सलमान जफर खिजरी ने की। इसमें झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) की प्रतिनिधि प्रियंका कुमारी, एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के अधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे।

जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, ग्रेंजा, विशुनपुर, भैंसादोन, पिंडारकोम और मरंगलोइया सहित प्रभावित गांवों के रैयतों ने “एनटीपीसी वापस जाओ”, “रैयतों का शोषण बंद करो” और “कोल कंपनी वापस जाओ” के नारे लगाने शुरू कर दिए। विरोध इतना तेज था कि प्रशासन को जनसुनवाई प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी।

ग्रामीणों के प्रमुख आरोप और मांगें

मुद्दा ग्रामीणों का पक्ष
ग्राम सभा की अनदेखी कंपनी स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति के बिना काम कर रही है। पहले गांव-गांव जाकर ग्राम सभा होनी चाहिए।
जमीन अधिग्रहण पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। विस्थापन स्वीकार नहीं।
पर्यावरणीय खतरा कोयला खनन से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा, आजीविका और सामाजिक जीवन पर बुरा असर पड़ेगा।
फर्जी रिपोर्ट की आशंका बड़ी संख्या में ग्रामीण इसलिए आए ताकि भ्रामक रिपोर्ट बनाकर जमीन पर कब्जा न हो सके।
कौनकौन रहे मौजूद
विरोध का नेतृत्व जिला परिषद सदस्य अनीता देवी और आजसू प्रखंड अध्यक्ष सह ग्रामीण नेता शंकर उरांव ने किया। कई अन्य जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे।

प्रभावित गांव


एनटीपीसी की इस परियोजना से ग्रेंजा, विशुनपुर, भैंसादोन, पिंडारकोम और मरंगलोइया गांव सीधे प्रभावित होंगे। इन गांवों के अधिकांश लोगों ने परियोजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है।हालांकि जनसुनवाई के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण रही, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना किसी भी परियोजना को लागू करना उचित नहीं होगा।

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