अलकतरा घोटाला मामले में ठेकेदार को तीन साल की सजा

Ranchi : झारखंड के बहुचर्चित 16 साल पुराने अलकतरा घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए क्लासिक कोल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिलीप कुमार सिंह को दोषी ठहराया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने उन्हें तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

अदालत ने मामले में ट्रायल का सामना कर रहे तत्कालीन जूनियर इंजीनियर सुरेश शर्मा को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। इस मामले में क्लासिक कोल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पवन कुमार सिंह, जमशेदपुर के तत्कालीन सहायक अभियंता (असिस्टेंट इंजीनियर) अनिल कुमार वर्मा, जूनियर इंजीनियर सुरेश शर्मा और कंपनी के निदेशक दिलीप कुमार सिंह आरोपी थे। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान पवन कुमार सिंह और अनिल कुमार वर्मा का निधन हो गया, जिसके कारण उनके विरुद्ध न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई।

यह मामला वर्ष 2010 में सामने आए अलकतरा घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि चक्रधरपुर-खरसावां क्षेत्र में 1.506 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य के दौरान 47 फर्जी बिल तैयार कर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि की अवैध निकासी की गई थी। यह परियोजना रोड कंस्ट्रक्शन डिवीजन, जमशेदपुर के अधीन थी।

घोटाले का खुलासा रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट (आरसीडी), जमशेदपुर के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर) विनोद कुमार ने किया था। उन्होंने मामले की सूचना सीबीआई को दी, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने जांच शुरू की। जांच में आरोपितों की कथित संलिप्तता पाए जाने पर सीबीआई ने 16 फरवरी 2010 को प्राथमिकी दर्ज की। जांच पूरी करने के बाद एजेंसी ने 22 अप्रैल 2011 को विशेष अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 5 अप्रैल 2018 को अदालत ने सभी आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए थे। करीब 16 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने अब इस मामले में फैसला सुनाते हुए एक आरोपी को दोषी करार दिया, जबकि दूसरे आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

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